श्रीमद्जगत्गुरु निश्चलानन्दसरस्वती अष्टकम
(रचनाकार – यश मुले जी)
ज्ञानसिन्धु तेजबिन्दु हिन्दुरत्नभूषणम् , धर्मराज्य प्राप्ति हेतु धारी व्रतकंकणम् ।
दिव्यसाधुतेजपुंज देववृंदवंदितम् , निश्चलानन्दसरस्वतीश स्वामी पाहिमाम् ।।
निश्चलानन्दसरस्वतीश स्वामी पाहिमाम् । स्वामी पाहिमाम् ।।१।।
तपोज्ञानवर्धनार्थ हिन्दूसैन्य स्थापकम् , भक्तिमुक्तिशक्ति सङ्ग विश्वतेज व्यापकम् ।
धर्मराष्ट्र उद्धरार्थ शक्तिमार्गदायकम् , निश्चलानन्दसरस्वतीश स्वामी पाहिमाम् ।।
निश्चलानन्दसरस्वतीश स्वामी पाहिमाम् । स्वामी पाहिमाम् ।।२।।
धर्मनिष्ठ राष्ट्रयोग तुष्ट ज्ञानवारिधीम् , धर्मक्षेत्र पुरीवास जगन्नाथसङ्गतीम् ।
साधूवर्य चरणपाद्य शिष्यकाम्यदायकम् , निश्चलानन्दसरस्वतीश स्वामी पाहिमाम् ।।
निश्चलानन्दसरस्वतीश स्वामी पाहिमाम् । स्वामी पाहिमाम् ।।३।।
देववृंद साधुवृंद विद्ववृंद भूषणम् , शङ्कराद्य दशनामी परम्पराविभूषणम् ।
वेदवंद्य स्तुत्यपाद गणितार्थ दायकम् , निश्चलानन्दसरस्वतीश स्वामी पाहिमाम् ।।
निश्चलानन्दसरस्वतीश स्वामी पाहिमाम् । स्वामी पाहिमाम् ।।४।।

देवगुरुतेजधारी स्वामिपदार्विन्द वन्दनम् , चण्डाधर्मखण्डनार्थ दण्डधारी स्वामिनम् ।
करपात्रस्वामिश्रेष्ठ कृपाऽमोद धारकम् , निश्चलानन्दसरस्वतीश स्वामी पाहिमाम् ।।
निश्चलानन्दसरस्वतीश स्वामी पाहिमाम् । स्वामी पाहिमाम् ।।५।।
यतिवर्यसेव्यपाद वेषधारी शङ्करम् , शिष्यकष्टताडनार्थ महावरप्रलयङ्करम् ।
सृष्टिव्यापी पञ्चतत्व कर्तृचरणवन्दनम् , निश्चलानन्दसरस्वतीश स्वामी पाहिमाम् ।।
निश्चलानन्दसरस्वतीश स्वामी पाहिमाम् । स्वामी पाहिमाम् ।।६।।
देवदेशधर्मस्थापनार्थरत यतीश्वरम् , तत्वशक्तियुक्तिग्लानि निवारणार्थ तत्परम् ।
सनातनम् विधावरम् कृपाकरम् श्रीगुरुम् , निश्चलानन्दसरस्वतीश स्वामी पाहिमाम् ।।
निश्चलानन्दसरस्वतीश स्वामी पाहिमाम् । स्वामी पाहिमाम् ।।७।।
निश्चलानन्दस्वामी स्वयंगुणार्कभास्करम् , अखिलवर्णनात् किम् करोति मूढ पामरम् ।
अखिलवृत्ति एकसङ्घ चरणवन्दनम् कुरुम् , स्वामिवर्य पाहिमहं शरणागत त्वत्पदम् ।।
स्वामिवर्य पाहिमहं शरणागत त्वत्पदम् । शरणागत त्वत्पदम् ।।८।।
निश्चलानन्दसरस्वतीश स्वामी पाहिमाम् । स्वामी पाहिमाम् ।। इति श्रीमद्जगत्गुरु निश्चलानन्दसरस्वती अष्टकम ।।
दिव्यसाधुतेजपुंज देववृंदवंदितम् , निश्चलानन्दसरस्वतीश स्वामी पाहिमाम् ।।
निश्चलानन्दसरस्वतीश स्वामी पाहिमाम् । स्वामी पाहिमाम् ।।१।।
तपोज्ञानवर्धनार्थ हिन्दूसैन्य स्थापकम् , भक्तिमुक्तिशक्ति सङ्ग विश्वतेज व्यापकम् ।
धर्मराष्ट्र उद्धरार्थ शक्तिमार्गदायकम् , निश्चलानन्दसरस्वतीश स्वामी पाहिमाम् ।।
निश्चलानन्दसरस्वतीश स्वामी पाहिमाम् । स्वामी पाहिमाम् ।।२।।
धर्मनिष्ठ राष्ट्रयोग तुष्ट ज्ञानवारिधीम् , धर्मक्षेत्र पुरीवास जगन्नाथसङ्गतीम् ।
साधूवर्य चरणपाद्य शिष्यकाम्यदायकम् , निश्चलानन्दसरस्वतीश स्वामी पाहिमाम् ।।
निश्चलानन्दसरस्वतीश स्वामी पाहिमाम् । स्वामी पाहिमाम् ।।३।।
देववृंद साधुवृंद विद्ववृंद भूषणम् , शङ्कराद्य दशनामी परम्पराविभूषणम् ।
वेदवंद्य स्तुत्यपाद गणितार्थ दायकम् , निश्चलानन्दसरस्वतीश स्वामी पाहिमाम् ।।
निश्चलानन्दसरस्वतीश स्वामी पाहिमाम् । स्वामी पाहिमाम् ।।४।।

देवगुरुतेजधारी स्वामिपदार्विन्द वन्दनम् , चण्डाधर्मखण्डनार्थ दण्डधारी स्वामिनम् ।
करपात्रस्वामिश्रेष्ठ कृपाऽमोद धारकम् , निश्चलानन्दसरस्वतीश स्वामी पाहिमाम् ।।
निश्चलानन्दसरस्वतीश स्वामी पाहिमाम् । स्वामी पाहिमाम् ।।५।।
यतिवर्यसेव्यपाद वेषधारी शङ्करम् , शिष्यकष्टताडनार्थ महावरप्रलयङ्करम् ।
सृष्टिव्यापी पञ्चतत्व कर्तृचरणवन्दनम् , निश्चलानन्दसरस्वतीश स्वामी पाहिमाम् ।।
निश्चलानन्दसरस्वतीश स्वामी पाहिमाम् । स्वामी पाहिमाम् ।।६।।
देवदेशधर्मस्थापनार्थरत यतीश्वरम् , तत्वशक्तियुक्तिग्लानि निवारणार्थ तत्परम् ।
सनातनम् विधावरम् कृपाकरम् श्रीगुरुम् , निश्चलानन्दसरस्वतीश स्वामी पाहिमाम् ।।
निश्चलानन्दसरस्वतीश स्वामी पाहिमाम् । स्वामी पाहिमाम् ।।७।।
निश्चलानन्दस्वामी स्वयंगुणार्कभास्करम् , अखिलवर्णनात् किम् करोति मूढ पामरम् ।
अखिलवृत्ति एकसङ्घ चरणवन्दनम् कुरुम् , स्वामिवर्य पाहिमहं शरणागत त्वत्पदम् ।।
स्वामिवर्य पाहिमहं शरणागत त्वत्पदम् । शरणागत त्वत्पदम् ।।८।।
निश्चलानन्दसरस्वतीश स्वामी पाहिमाम् । स्वामी पाहिमाम् ।। इति श्रीमद्जगत्गुरु निश्चलानन्दसरस्वती अष्टकम ।।
