सनातन वैदिक ध्वज

राष्ट्रोत्कर्ष अभियान सनातन संविधान हिन्दूराष्ट्र

श्री हरि:
श्रीगणेशाय नमः

नारायणाखिलगुरो भगवन् नमस्ते

जय गणेश
श्रियं सरस्वतीं गौरीं गणेशं स्कन्दमीश्वरम्।
ब्रह्माणं वह्निमिन्द्रादीन् वासुदेवं नमाम्यहम्॥

"लक्ष्मी, सरस्वती, गौरी, गणेश, कार्तिकेय,
शिव, ब्रह्मा एवम् इन्द्रादि देवोंको तथा
वासुदेवको मैं नमस्कार करता हूँ।।"


सनातन वैदिक ध्वज


सनातन वैदिक ध्वज
‘त्रिकोण रक्तवर्णके वस्त्रपर अङ्कित
श्वेत-वर्णके सूर्यके मध्यमें दक्षिणावर्त स्वस्तिक’
को वैदिक ध्वज माना गया है। —

‘एता देवसेना: सूर्यकेतव: सचेतस:।
अमित्रान् नो जयतु स्वाहा।।
’
(अथर्ववेद ५. २१. १२)

‘अरूणै: केतुभि: सह।’
(अथर्ववेद ११. १२. २)

‘स्वस्त्यस्तु विश्वस्य’
(श्रीमद्भागवत ५. १८. ९)

सूर्यमण्डलान्तर्गत सूर्यस्वरूप सर्वरूप अप्रतिरूप शिव
अपनी ध्वजा और पताका पर सूर्यका चिह्न धारण करते हैं। –

‘नमोऽस्त्वप्रतिरूपाय विरूपाय शिवाय च।
सूर्याय सूर्यमालाय सूर्यध्वजपताकिने॥
‘
(महाभारत-शान्तिपर्व २८४.८१)

— श्रीगोवर्द्धनमठ-पुरीपीठाधीश्वर-श्रीमज्जगद्गुरु-शंकराचार्य
स्वामी श्रीनिश्चलानन्द सरस्वती द्वारा लिखित पुस्तक
“सङ्घे शक्ति: कलौ युगे” पृष्ठ संख्या १८
मित्रैः सह साझां कुर्वन्तु

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